भारतीय परिदृश्य में गांजा
नशे का मायाजाल समूचे
विश्व में भारत वर्ष में तेज़ी के साथ फैल रहा है और इस की बढ़ने की रफ़्तार में पिछले दशक
में खासा इज़ाफ़ा हुआ है। इस भयानक प्रकोप से हमारा भारत भी अछूता नहीं है। अवलोकन करने
पर ये पाया गया है कि पिछले कुछ सालों में गांजे का उपभोग काफी बढ़ा है। गांजा जिसको
बोल-चाल की भाषा में वीड
भी कहा जाता है, उस के सेवन का चलन खास कर शहरी युवाओं के बीच बहुत तेज़ी से बढ़ा है। ये थोड़ी अचरज
की बात है क्योंकि यही पढ़ा लिखा शहरी वर्ग गांजे को एक समय बहुत नीच तरह का नशा समझता
था और मानता था कि खाली साधू और फ़क़ीर तरह के लोग ही गांजा फूंकते हैं पर यही युवा आज
गांजे के उपभोग के फायदे गिनाते नहीं थकते। इस में हैरानी की बात ये है कि इस की वकालत
करने वाले युवा ज्यादातर पढ़े लिखे और अच्छे घरों से आते हैं। ये देखा गया है कि इसकी
चपेट में आने वाले युवा कॉलेज के छात्र-छात्रा हैं जो समय के साथ, बिना इस भयानक आदत के दुष्प्रभाव जाने बैगेर इस की लत का शिकार हो जाते हैं। हमारे समाज में ये बदलाव पिछले दशक में तेज़ी के
साथ हुआ है।
मध्य भारत के प्रमुखनशा मुक्ति और पुनर्वास केंद्रों के अध्ययन के आधार पर :-
गांजे के बढ़ते हुए प्रभाव
का एक मुख्य कारण फिल्मे और पश्चिमी संगीत कलाकारों का प्रभाव है या इन को दूसरे शब्दों
मैं कहा जाए तो समस्या हमारे प्रभावित युवा वर्ग के देखने के नज़रिये में है।हम बॉक्स
ऑफिस में बहुत हिट रही फिल्मे जैसे ‘हेरोल्ड एंड कुमार’ या फिर ‘पाइनएप्पल एक्सप्रेस’ या और भी कई सारी फिल्मे की बात करें जिसमे कलाकारों
को गांजे के नशे में मस्ती करते हुए या हास्यपद हरकते हुए बताया गया है उसे युवाओं
का एक वर्ग जो आंखें मूँदकर पश्चिम का अनुसरण करता है इसे फैशन के तौर पर लेता है।
इसके सिवा एक और अहम्
कारण
हमारे देश की तमाम मिडीया एजेन्सीयों की इस मामले के प्रति उदासीनता, मुझे याद
नहीं की दो-चार प्रोग्राम को छोड़ कभी कोई भी विषेश कार्यक्रम इस मुद्दे पर
प्रसारित हुआ हो। इसके विपरीत उल्टा किसी भी सेलेब्रिटी से जुड़े ड्रग्स के मामले
को और सनसनीख़ेज बना कर पेश करते हैं। इसके इलावा न्यूज़ चैनलों पर और अन्य
मनोरंजन के चैनलों पर फिल्मी सितारों, संगीतकारों और मशहूर लोगों की तस्वीरें
फ्लैश होती रहती हैं। आजकल के कुछ गानों के बोल चाहे वो अंग्रेजी हो या हिन्दी बहुत
घटिया और नशे के उपभोग को बढ़ावा देने वासे होते हैं, जिससे बहुत से युवा प्रभावित
होते हैं।
अब हम बात करते हैं कानूऩ व्यवस्था की जो की गाँजे के मामले में काफी लचर है
और लगभग भारत के सभी राज्यों की पुलिस का रवैया भी इस नशे के प्रति ढीला-ढाला ही
है। इसी वजह से गाँजा का उत्पादन और तस्करी में प्रति वर्ष इज़ाफ़ा हुआ है। इस वजह
से गाँजे के सप्लाई (ड्रग पैडलर्स) का अन्त के उपभोक्ता तक पहुँचना सरल हुआ है। आज
के समय लगभग 80 प्रतिशत कालेज या महाविधालयों में गाँजा के विक्रता का पता पूछ
सकते हैं ठीक उसी तरह से जैसे चाय की दुकान का पता पूछ रहें हो। कई बार गाँजे की
बिक्री बढ़ाने के लिये उसके तस्कर और विक्रेता उसमें कुछ ऐसे रसायन (केमिकल्स)
मिला देते हैं जिससे होने वाला नशा और बढ़ जाता है और गाँजा पीने वाले को इसकी लत
और जल्दी लग जाती है। इसके सिवा गाँजा बेचते समय उसकी मात्रा बढ़ाने के लिये उसमें
कई तरह की गंदगी और पत्ते मिला दिये जाते हैं। इन सब के बावजूद असली समस्या की जड़
हमारे युवा पीढ़ी के देखने के नज़रीये में है क्योंकी इंटरनेट युग के इस समय में
गलत प्रभाव तेज़ी से फैलता है।
गाँजे को ड्रग्स की दुनिया का प्रवेश द्वार माना जाता है, वो इसलिये क्योंकि जब
एक बार इंसान गाँजे का सेवन करना शुरु कर देता है तो उसके शरीर में गाँजे के प्रति
शहनशीलता का विकास हो जाता है, इसा वजह से उस इंसान को नशे के लिये और ज्यादा
मात्रा लगने लगती है और बहुत बार वो नशा पाने के लिये किसी नये विकल्प (ड्रग) की
तलाश में जुट जाता है।
गाँजे के उपभोग के बहुत से घातक दुष्प्रभाव हैं जैसे याद्द्श्त पर असर, ऐसा
होने पर गाँजा पीने वाले इंसान को बहुत सी बातें भूल जाने का रोग हो जाता है। कई
बार गाँजे की लत का शिकार व्यक्ति ऐसी चीजें सुनने और सूघंने लगता है जो
वास्तविक्ता में होती ही नहीं हैं, और तो और कई बार तो ये भ्रम इस हद तक बढ़ जाता
है कि इंसान को लगने लगता है की वो किसी से बात कर रहा है जब की ये सब उस के दिमाग
में आये विकार का नतीजा होता है। मतिभ्रम कभी-कभी इतना भयानक होता है कि उसे यकीन
होने लगता है कि वह स्वंय भगवान से मिल कर आया है। इस स्थिती को अंग्रजी में ‘साईकोसिस’ कहते हैं। इस साईकोसिस
का इलाज बहुत लंबी अवधी तक चलता है क्योंकि ये पूरा मसला इंसान के दिमागी ढ़ांचे
से जुड़ा होता है और कई बार बात ज्यादा बिगड़ने पर इंसान पागल तक हो जाता है।
इंसान के गाँजा छोड़ने पर भी ये प्रभाव काफी दिनो तक बना रहता है। इसके साथ ही
गांजा का व्यसन से सेक्स से जुड़ी समस्या, हृदय गति पर प्रभाव, और भी कई तरह की
परेशानी का कारणबनता है।
हमारे देश में ऐसे कई संस्थाएं (एन.जी.ओ) और नशा मुक्ति केंद्र हैं जो इस दिशा
में जागरुकता फैलाने का और गाँजे के नशे की लत से पीड़ित लोगों के इलाज का काम कर
रही है। अगर आप या पहचान का कोई व्यक्ति या आपके परिवार का कोई अन्य इस भयानक लत
का शिकार है तो उसे तुरंत किसी अच्छे नशा मुक्ति केंद्र (रीहैब सेंटर) की सहायता
लेनी चाहिये और उनके उपचार के प्रोग्राम के बारे में जानना चाहिये।
अंत में एक बात जरुर, ये समस्या हमारे समाज में है और खतरनाक गति से बढ़ रही
है और इससे बचने का सबसे सरल उपाय है कि हम इसके बारे में खुल कर बात करें और जो
इस समस्या से ग्रसित हैं उन्हें इलाज लेने के लिये प्रेरित करें।
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